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यूरोप में बढ़ा आयुर्वेद का महत्व, स्विट्जरलैंड में डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने बताया समग्र स्वास्थ्य का मार्ग

यूरोप सहित पूरे विश्व को आज आयुर्वेद की आवश्यकता – डॉ डी के श्रीवास्तवा

हॉलैंड ,नीदरलैंड , बेल्जियम के बाद स्विट्जरलैंड में अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. डी. के. श्रीवास्तव ने दिया समग्र स्वास्थ्य का संदेश

स्विट्जरलैंड। आज पूरी दुनिया, विशेषकर यूरोप, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती चुनौती का सामना कर रही है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग, अस्थिजन्य रोग ,नींद की समस्याएँ, तनाव, चिंता तथा पाचन संबंधी विकार ऑटो इम्मून डिसऑर्डर आधुनिक समाज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर विषय बनते जा रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इन बीमारियों के निदान, आपातकालीन उपचार, शल्य चिकित्सा और जीवनरक्षा के क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है। इसके बावजूद, अनेक दीर्घकालिक बीमारियों में केवल दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली, खानपान, शारीरिक सक्रियता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की समस्याओं के समग्र प्रबंधन में आयुर्वेदिक औषधियाँ महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभा सकती हैं। आयुर्वेद में रोगी की प्रकृति, पाचन क्षमता, आहार-विहार और रोग की अवस्था के अनुसार औषधियों का चयन किया जाता है। उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन में इनका उपयोग संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम और स्वस्थ दिनचर्या के साथ किया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक आयुर्वेदिक औषधि की प्रभावशीलता और सुरक्षा के वैज्ञानिक प्रमाण अलग-अलग हैं, इसलिए गुणवत्तापूर्ण औषधियों का चयन, संभावित दुष्प्रभावों तथा अन्य दवाओं के साथ होने वाली प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देना आवश्यक है। आयुर्वेदिक औषधियों का उद्देश्य स्वास्थ्य प्रबंधन में उचित योगदान देना है, न कि आवश्यक आधुनिक चिकित्सा या निर्धारित दवाओं का विकल्प बनना।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा आयुर्वेद चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय से समग्र स्वास्थ्य (Holistic Healthcare) की अवधारणा आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण होती जा रही है।

जीवनशैली संबंधी बीमारियों के समाधान में आयुर्वेद की भूमिका
आयुर्वेद केवल बीमारी होने के बाद उपचार करने की पद्धति नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा, रोगों की रोकथाम, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और मानसिक संतुलन पर भी विशेष बल देता है।
आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति, पाचन क्षमता, दिनचर्या, मानसिक स्थिति और पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी सलाह में व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझना महत्वपूर्ण है।
यूरोप में व्यस्त जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, अनियमित भोजन और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच आयुर्वेद की आनंददायक स्वास्थ्य संबंधी शिक्षाएँ उपयोगी सहायक भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प मानने के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों, रोगी की आवश्यकताओं और सुरक्षा के आधार पर एक पूरक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में अपनाना अधिक उचित है।

भारत की आयुर्वेद समग्र स्वास्थ्य परिकल्पना और विश्व का भविष्य
भारत आज पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच संवाद को प्रोत्साहित कर रहा है। समग्र स्वास्थ्य की परिकल्पना का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगी विशेषताओं को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि रोगी को अधिक व्यापक, व्यक्तिगत और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो सकें।
इस दृष्टिकोण में आधुनिक चिकित्सा की निदान क्षमता, आपातकालीन सेवाएँ और जीवनरक्षक उपचार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुर्वेद आहार, दिनचर्या और स्वास्थ्य संरक्षण के सिद्धांत के साथ आयुर्वेदिक औषधियों प्रस्तुत करता है।

यूरोप में आयुर्वेद का बढ़ता महत्व

यूरोप में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ लोग अब केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, बेहतर नींद, संतुलित भोजन, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ वृद्धावस्था के उपाय भी तलाश रहे हैं।
ऐसे समय में भारत का आयुर्वेद यूरोप को एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है—स्वास्थ्य को केवल रोग की अनुपस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली के बीच संतुलन के रूप में समझना।
हालांकि, आयुर्वेदिक औषधियों की प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए। विशेष रूप से हृदय रोग, मधुमेह और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी निर्धारित दवाएँ बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए।

यूरोप सहित पूरे विश्व को आज आयुर्वेद की आवश्यकता : डॉ. डी.के. श्रीवास्तव

ऋषिकेश/स्वित्जरलैंड। नीदरलैंड, बेल्जियम और हॉलैंड में आयुर्वेदिक कार्यशालाओं एवं व्याख्यानों के बाद अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद विशेषज्ञ और गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने स्वित्जरलैंड के लूजर्न और ज्यूरिख में आयोजित कार्यशालाओं में आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य का महत्त्व बताया। उन्होंने कहा कि आज यूरोप सहित पूरी दुनिया मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग, तनाव, अनिद्रा और पाचन संबंधी समस्याओं जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का सामना कर रही है。

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा ने रोगों के निदान, आपातकालीन उपचार और जीवनरक्षा में उल्लेखनीय प्रगति की है, वहीं स्वास्थ्य संरक्षण के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य और व्यवस्थित दिनचर्या भी आवश्यक हैं। भारत की समृद्ध आयुर्वेद परंपरा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर लोगों के स्वास्थ्य एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति, खानपान और दिनचर्या के अनुरूप स्वास्थ्य प्रबंधन पर बल दिया जाता है। उचित चिकित्सीय मार्गदर्शन में योग, प्राणायाम और स्वस्थ जीवनशैली को समग्र स्वास्थ्य कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया जा सकता है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। यूरोप के विभिन्न देशों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से वह भारतीय आयुर्वेद परंपरा से लोगों को परिचित करा रहे हैं। उनका संदेश है कि रोगों के उपचार के साथ स्वास्थ्य संरक्षण, मानसिक संतुलन और जीवनशैली में सुधार को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए。

Dr DK Shrivastava